हाइकोर्ट के फैसले से दिल्ली की गरमाई सियासत

नई दिल्ली।
नैनीताल हाइकोर्ट के फैसले ने देहरादून से ज्यादा दिल्ली की तपस बढ़ा दी है। कांग्रेस इसे अपनी जीत बता रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है। केंद्र सरकार आज सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। कांग्रेस भी इस फैसले के कुछ हिस्से से नाखुश हैं। अदालत ने बागियों को वोट करने का अधिकार देकर कांग्रेस की पेशानी पर बल ला दिया है। इससे कांग्रेस की परेशानी भी बढ़ गई हैं। 31 मार्च को बहुमत साबित करना कांग्रेस के लिए काफी मुश्किल हो गया है। हालांकि कांग्रेस बहुमत साबित करने का दावा कर रही है।
वहीं दूसरी ओर बहुमत साबित करने में कांग्रेस की असफलता की संभावना को देख भाजपा में सरकार बनाने को लेकर रणनीतियां बननी आरंभ हो गई है। सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने कैलाश विजयवर्गीज को इसकी जिम्मेदारी सौंप रखी है। भाजपा का दावा है कि उनके पस 37 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं कांग्रेस ने राज्यपाल के समक्ष विधायकों का परेड कराया। इसमें 33 विधायक शामिल हुए। जिसमें कांग्रेस के 27 विधायक के अलावा छह विधायक निर्दलीय और अन्य छोटे दलों से थे। उत्तराखंड के 71 सदस्यीय विधानसभा में मुख्यमंत्री हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए 36 विधायकों की दरकार है।
कांग्रेस की असफलता का पोल खोलते हुए भाजपा मीडिया प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कहा कि 18 मार्च को ही यह साबित हो चुका था कि हरीश रावत के पास बहुमत नहीं है। विनियोग विधेयक पर अधिकतर विधायकों द्वारा वोटिंग की मांग किए जाने के बावजूद स्पीकर का इंकार करना इसी का सबूत है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर रावत सरकार के पास बहुमत था तो फिर साबित क्यूं नहीं किया। वह चाहते तो बहुमत साबित कर सकते थे। बहुमत नहीं रहने की वजह से उन्होंने ऐसा करना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि उत्तराखंड में बिना बहुमत की सरकार चलती रहे।

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