बिहार में वैसाखी का दूसरा रूप जूड़ शीतल , खाते हैं बासी खाना

पटना, सिख समुदाय में  वैशाखी का पर्व मनाया जाता है। पर बिहार में आज का दिन कई परंपरागत पर्व के रूप में जाना जाता है। बिहार में आज जूड़ शीतल मनाया जा रहा है। आज के दिन वहां सत्तू और गुड़ खाया जाता है। दाल की पूडि़यां बनती हैं। और तो और ये अकेला ऐसा पर्व है जिसमें बासी खाने की परंपरा है। हिन्दू धर्मावलंबियों का महत्वपूर्ण पर्व मेष संक्रांति 13 अप्रैल को है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास भी संपन्न हो जाएगा। इसके साथ ही 16 अप्रैल से शादी-ब्याह, मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

असल में मिथिलांचल आज जूड़ शीतल पर्व मना रहा है। आज जूड़ शीतल या सतुआइन के लिए जो सत्तू और गुड़ खाने की परंपरा है लेकिन आज शाम को ही कड़ी चावल (बौरी-भात) बना दिया जाता है। इसमें खासतौर पर हींग, मेथी का इस्तेमाल होता है। इस बनाए हुए भोजन को आज न खाकर कल खाया जाता है। बासी खाने के पीछे पूर्वजों का वैज्ञानिक तर्क भी था, उनके मुताबिक चंद्रमा और सूर्य की चाल आज के नक्षत्र और राशि में इस तरह हो जाती है कि खाद्य पदार्थों के खराब होने के लिए कारक कीटाणु सक्रिय नहीं रहते। इसके अलावा इसी दिन से सौरवर्ष का भी शुभारंभ हो जाएगा। सौर मास के हिसाब से वैशाख की शुरुआत हो जाएगी।

इसमें सुबह से एकदूसरे पर पानी डालने की परंपरा है। खासतौर पर उनको जिनसे आपका मजाक का रिश्ता बनता है यानी देवर, भाभी, शाली, सरहज आदि। वैसे तो आपने विदेशों में चिकनी मिट्टी में होली खेलते हुए खूब सुना और देखा होगा लेकिन बिहार में आज के दिन मड होली होती है। लेकिन यहां सिर्फ चिकनी मिट्टी से ही होली होती है। इसके पीछे का वैज्ञानिक तर्क ये है कि गर्मी आज से माना जाता है कि शुरू हो गई। ऐसे में आज का दिन शीतल करने की दृष्टि से मनाया जाता है। चिकनी मिट्टी न सिर्फ आपके शरीर को ठंडा रखता है बल्कि बतौर एंटी बायोजिक भी होता है।

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