फिल्म ‘शिवाय’ कहानी में कोई नयापन नहीं

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इस सप्ताह प्रदर्शित फिल्म ‘शिवाय’ को देखकर  यह भी बताना जरूरी है कि निर्माता, निर्देशक और अभिनेता अजय देवगन की यह फिल्म कहानी और निर्देशन के मोर्चे पर निराश करती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अजय ने इस फिल्म पर बेतहाशा पैसा खर्च किया है और यह फिल्म उनके दिल के भी काफी करीब है। यही नहीं फिल्म के एक्शन दृश्य हॉलीवुड की फिल्मों को टक्कर देने की हैसियत रखते हैं।
 फिल्म की खासियत यह है कि इसमें देश विदेश के दो हजार से ज्यादा खिलौनों का इस्तेमाल किया गया है और एक पोलिश अभिनेत्री एरिका कार ने बॉलीवुड में इस फिल्म के जरिये एंट्री कर ली है।
फिल्म की कहानी शिवाय (अजय देवगन) के इर्दगिर्द घूमती है। वह उत्तराखंड में बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बसे एक गांव में रहता है। वह पर्यटकों को ट्रैकिंग के लिए हिमालय ले जाने का काम करता है और जरूरत पड़ने पर भारतीय सेना की मदद भी करता है। एक दिन ओल्गा (एरिका कार) यहां अपने कुछ दोस्तों के साथ ट्रैकिंग के लिए आती है लेकिन इसी दौरान एक जबरदस्त बर्फीला तूफान आ जाता है। तूफान से शिवाय ओल्गा और उसके दोस्तों को बचाता है, लेकिन इसी तूफान में फंसे होने के दौरान इनके बीच शारीरिक संबंध बन जाता है। ओल्गा को कुछ वक्त के लिए शिवाय के गांव में रुकना पड़ता है तो उसे पता चलता है कि वह मां बनने वाली है। वह अपने परिवार के पास बुल्गारिया जाने के लिए कहती है और बच्चे को नहीं चाहती लेकिन शिवाय उसे समझाता है कि वह उसके लिए बच्चे को पैदा करे। ओल्गा एक बेटी को जन्म देकर अपने देश लौट जाती है। ओल्गा और शिवाय की बेटी बोल नहीं पाती, लेकिन सुन सकती है।
 गौरा को अपनी मां के बारे में पता लगता है तो वह मां से मिलने की जिद करती है। शिवाय नहीं चाहता कि गौरा मां से मिलने जाए जिसने जन्म देने बाद उसकी सुध तक नहीं ली। लेकिन आखिरकार गौरा की जिद के सामने शिवाय को झुकना पड़ता है। शिवाय गौरा को मां से मिलाने बुलगारिया आता है, लेकिन यहां आने के दूसरे ही दिन गौरा का अपहरण हो जाता है।
शिवाय के किरदार में अजय देवगन खूब जमे हैं और एक्शन दृश्यों में उन्होंने जान डाल दी है लेकिन एरिका के साथ उनकी जोड़ी बिलकुल भी नहीं जमी।  निर्देशक के रूप में अजय देवगन की सबसे बड़ी विफलता यह रही कि वह एक साधारण सी कहानी में कोई नयापन नहीं डाल पाये और कहानी पर भी उनकी पकड़ नहीं दिखी। फिल्म में हिंसा इतनी ज्यादा हो गयी है कि जो पिता-पुत्री के भावनात्मक दृश्य अच्छे बन पड़े हैं वह भी दब कर रह गये हैं।
कलाकार- अजय देवगन, सायशा सहगल, एरिका कार, वीर दास।
निर्देशक- अजय देवगन।

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