देश की एकता, अखण्डता, सार्व भौमिकता और प्यार−दुलार का त्योहार है होली

0
218

होली देश का सबसे पुराना त्योहार है जिसे छोटे−बड़े अमीर−गरीब सभी लोग मिलजुल कर मनाते हैं। यह असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। राग−रंग का यह पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है। राग रंग और नृत्य इसके प्रमुख अंग हैं। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है।

होली राग रंग और मौज मस्ती का बांका त्योहार है। होली के इस पावन पवित्र पर्व पर हमें यह संकल्प लेना चाहिये कि हम बुराई का परित्याग कर अच्छाई को ग्रहण करेंगे। ऐसा कोई भी कार्य नहीं करेंगे जो दूसरे को बुरा लगे। हम एक−दूसरे के सुख−दुख में भागीदारी देंगे और प्रेम और मोहब्बत के संदेश को घर−घर पहुंचाकर देश और समाज में सहिष्णुता, एकता और भाईचारे की भावना को विकसित करेंगे। इसी में हमारा, समाज का और देश का व्यापक हित निहित है। 

होली रंग बिरंगा पर्व है। रंग और पिचकारी लेकर युवा निकल पड़ते हैं और एक−दूसरे पर अबीर, गुलाल और रंग डालकर होली मनाते हैं। हर तरफ लोग मस्ती में झूमते व एक दूसरे पर अबीर−गुलाल लगाते व रंगों की वर्षा करते दिखाई देते हैं। यह त्योहार सामाजिक समानता, राष्ट्रीय एकता और अखण्डता तथा विभिन्नता में एकता का साक्षात प्रतीक है। होली मनाते समय जात−पात, छोटा−बड़ा का भी कोई भेद नहीं होता। अमीर−गरीब, बच्चे, युवा बुजुर्ग सभी मिल−जुल कर यह त्यौहार मनाते हैं। होली रंगों के साथ गीत−संगीत और नृत्य का अनूठा त्यौहार है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, पंजाब, दिल्ली आदि हिन्दी भाषी प्रदेशों में होली का पर्व भारी उल्लास और रंगों के साथ मनाया जाता है। देश के अन्य राज्य भी अलग−अलग तरीकों से होली का आनन्द उठाते हैं। ब्रज, मथुरा और बरसाने की होली विश्व प्रसिद्ध है। देश में होली पर्व को अनेक कहानियों के साथ भी जोड़कर देखा जाता है। उत्तर भारत के राज्यों में जिसमें राजस्थान भी शामिल है, भक्त प्रहलाद की कहानी विख्यात है। प्रहलाद भक्त की इस प्राचीन कहानी में बताया गया है कि हिरण्यकश्यप नाम का एक क्रूर और शक्तिशाली शासक था। वह स्वयं को न केवल भगवान मानता था अपितु दूसरों को भी प्रेरित करता था कि उसे भगवान के रूप में माना जाकर उसकी पूजा−अर्चना की जाये। उसने अपने राज्य में भगवान का नाम लेने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था और भगवान के भक्तों पर तरह−तरह के अत्याचार करता था। हिरण्यकश्यप का पुत्र था प्रहलाद।
हमारे देश में होली के त्योहार का अपना महत्व है। यह केवल गाने बजाने या रंग गुलाल का त्योहार ही नहीं है अपितु देश की एकता, अखण्डता, सार्व भौमिकता और प्यार−दुलार का भी त्योहार है। इस दिन लोग किसी चीज का बुरा नहीं मानते। इस त्योहार पर लोग पहले भांग का सेवन करते थे मगर अब कई प्रकार के नशे का भी सेवन करने लगे हैं। रासायनिक रंगों के प्रयोग से हमारे पर्यावरण को क्षति पहुंची है और रासायनिक रंगों से शरीर में अनेक प्रकार की व्याधियां हो जाती हैं। इसलिए नशे और रासायनिक रंगों से बचा जाना चाहिये। अनेक लोग पानी की बरबादी को देखते हुए सूखी होली भी खेलते हैं। होली का साक्षात चित्रण हमारे घरों में देखने को मिलता है। पुरानी हवेलियों, मंदिरों, किलों पर इस पर्व के चित्र आज भी देखने को मिल जायेंगे। ऐसा दूसरा उदाहरण हमें देखने को नहीं मिलेगा।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY