छठें दिन होगी मां कात्यायनी की पूजा

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पं,गणपति झा

नई दिल्ली,जगतमाता पार्वती ने महर्षि कात्यायनी की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया था अतः उन्हें कात्यायनी भी कहा जाता है। उनकी उपासना से साधक को अलौकिक तेज और तपशक्ति प्राप्त होती है जिसके बल पर उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सभी नष्ट हो जाते हैं। इनकी पूजा के बाद निम्न मंत्र का 101 बार जप करने से दिव्य शक्तियां प्राप्त होती हैं-
चन्द्रहासोज्जवलकरा शाईलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दग्घादेवी दानवघातिनी।।
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम।।

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