नवरात्र 2017: इस जगह रखें मां दुर्गा की मूर्ति

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पं.गणपति झा
नई दिल्ली,जगत शक्ति से ओत-प्रोत है। आदि शक्ति अपने अनेक रूपों में व्याप्त है। जितने भी स्त्रीलिंग शब्द है, सब शक्ति के ही रूप हैं। जगत में तीन प्रधान शक्तियां हैं, उन्हीं की माया से इस संपूर्ण संसार का संचालन हो रहा है।पूजा स्थान में श्री दुर्गा जी का चित्र या मूर्ति का मुंह दक्षिण दिशा में रखना शुभ फल देता है, पूर्व दिशा में विजय श्री प्रदान करता है और पश्चिम दिशा में कार्य सिद्ध करता है। इनका मुख उत्तर दिशा में नही होना चाहिए।

नवरात्रि में शक्ति पूजन के अखंड ज्योति, श्री गणेश, भूमि, संकल्प के उपरांत कलश, नवग्रह, भैरव आदि का पूजन करना आवश्यक माना गया है। पूर्णत्व पाने के लिए हम सब आपका ध्यान करते हैं। मेरी अविज्ञता, अज्ञानता, अवगुण रूपी रज्जु की दृढ़ ग्रंथि को काट कर शक्ति प्रदान करें।’नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि से तृतीया तिथि तक श्री महाकाली के स्वरूप के पूजन करने से पूर्व आदि शक्ति के नौ स्वरूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणि, चन्द्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री का पूजन क्रमश: नौ सुपारी की ढेरी पर स्थापित कर कुमकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, फल आदि अर्पित कर पूजन करें। इसके बाद श्री महाकाली का पूजन कर ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै’ की एक माला तथा ‘क्रीं ह्रीं हुं दक्षिण कालिके क्रीं ह्रीं हुं नम:’ मंत्र की 11 माला जप करें।

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