करवा चौथ: सुहागिन करेंगी अपने चांद का दीदार

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 कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करक चतुर्थी (करवा-चौथ) व्रत करने का विधान है। स्त्री किसी भी आयुजातिवर्णसंप्रदाय की होसबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ अपने पति की आयुस्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वे यह व्रत रखती हैं।
सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर चंद्रमा का पूजन कर अर्घ्य प्रदान करें। इसके पश्चात ब्राह्मणसुहागिन स्त्रियों व पति के माता-पिता को भोजन कराएँ। भोजन के पश्चात ब्राह्मणों को यथाशक्ति दक्षिणा दें। पति की माता (अर्थात अपनी सासूजी) को उपरोक्त रूप से अर्पित एक लोटावस्त्र व विशेष करवा भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि वे जीवित न हों तो उनके तुल्य किसी अन्य स्त्री को भेंट करें। इसके पश्चात स्वयं व परिवार के अन्य सदस्य भोजन करें।
पूजन विधि
बालू अथवा सफेद मिट्टी की वेदी पर शिव-पार्वतीस्वामी कार्तिकेयगणेश एवं चंद्रमा की स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी पर कलावा बाँधकर देवता की भावना करके स्थापित करें। पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें।
पूजन हेतु निम्न मंत्र बोलें 
ॐ उमा दिव्या नम:‘ से पार्वती का, ‘ॐ नमः शिवाय‘ से शिव का, ‘ॐ षण्मुखाय नमः‘ से स्वामी कार्तिकेय का, ‘ॐ गणेशाय नमः‘ से गणेश का तथा ॐ सोमाय नमः‘ से चंद्रमा का पूजन करें।

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