पंचतत्व में विलीन हुए शशि कपूर

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मुंबई,बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर शशि कपूर के  पार्थिव शरीर को सांताक्रूज ले जाया गया। वहां उन्हें पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शशि कपूर को अंतिम श्रद्धांजलि देने फिल्म इंडस्ट्री के लगभग सभी लोग मौजूद रहे। अमिताभ बच्चन, सलमान के पिता सलीम खान, ऋषि कपूर, रणबीर कपूर सभी वहां मौजूद रहे। मुंबई पुलिस ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।

उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे झंडे से लिपेटा गया।कल रात से मुंबई में हो रही भारी बारिश के बावजूद उन्हें अंतिम विदाई देने लोगों का हूजुम मौजूद था। अंतिम संस्कार के समय वहां मौजूद परिवार और दोस्त अपने आंसू नहीं रोक पाए। उनके साथ बिताए पलों को याद कर भावुक हो गए।

अपने अलग अंदाज और जबरदस्त एक्टिंग से सबको अपना दीवाने बनाने वाले शशि कपूर का 79 साल की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। वह काफी समय से बीमार थे। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार दोपहर 12 बजे किया जाएगा।

नेता रणधीर कपूर ने खबर की पुष्टि की। रणधीर कपूर ने बताया, ”हां उनका निधन हो गया। उनको पिछले कई वर्षों से किडनी से जुड़ी समस्या थी। वह कई वर्षों से डायलिसिस करा रहे थे।

हिन्दी फिल्म और थियेटर जगत के शुरुआती स्टार पृथ्वीराज कपूर के घर 18 मार्च, 1938 को जन्मे शशि कपूर ने चार वर्ष की आयु से अपने पिता द्वारा निर्मित और निर्देशित नाटकों में काम करना शुरू कर दिया था।  1984 में पत्नी जेनिफर की कैंसर से मौत के बाद से ही शशि कपूर अकेले रहने लगे थे और कई बार उनकी तबीयत भी बिगड़ती गई। बीमारी की वजह से शशि कपूर ने फिल्मों से दूरी बना ली थी। साल 2011 में शशि कपूर को भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था। 2015 में उन्हें दादा साहेब पुरस्कार भी मिल चुका था।

शशि कपूर को तीन बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। 1979 में शशि द्वारा निर्मित फिल्म जुनून को बेस्ट फीचर फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 में फिल्म ‘मुहाफिज’ के लिए उन्हें स्पेशल ज्युरी अवॉर्ड। बता दें कि शशि कपूर के सीने में इंफेक्शन से पीड़िता था, जिसके बाद कई बाइपास सर्जरी से भी उन्हें गुजरना पड़ा था।

बचपन से ही था एक्टिंग का शौक

शशि कपूर को बचपन से ही एक्टिंग का शौक था। उनके बचपन का नाम बनबीर राज कपूर था। शशि स्कूल में नाटकों में हिस्सा लेना चाहते थे। उनकी यह इच्छा वहां तो कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उन्हें यह मौका अपने पिता के ‘पृथ्वी थियेटर्स’ में मिला।

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