काल सेंटर में बंगलौर के लिए चुनौती बनता दंतेवाड़ा- रमन सिंह

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हिन्दुस्तान समाचार द्वारा आयोजित बस्तर  विकास संवाद

दंतेवाड़ा,गोलियों की तड़तड़ाहट और डर का खौफ बस्तर और दंतेवाड़ा के लिए इतिहास की बात हो गई है।अब दंतेवाड़ा में युवाओं की फौज की मटरगस्ती, लड़कियों का साइकिल से कतारबद्धहोकर स्कूल जाते हुए और एक छत के नीचे कंप्यूटर पर काम करते युवक—युवतियों देखना  बस्तर का बदलता स्वरूप बताता है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने बस्तर और दंतेवाड़ा से होकर गुजरने वाली राज्यमार्ग या राष्ट्रीय राजमार्ग को विश्व स्तरीय बना दिया है।छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा एक ऐसा इलाका हुआ करता था जहां एक एक मीटर सड़क बनाने के लिए कई कई महीने की मशक्कत करनी पड़ती थी। लेकिन अब यह बीते दिनों की बात होकररह गई है जहां पहले दिन में भी यहां चलने सेडर लगता था वहां अब दिन हो या रात चौबीस घंटे गाड़ियां इन सड़कों पर दौड़ती रहती है। दंतेवाड़ा के जिला अधिकारी सौरभ कुमार ने नक्सलियों के मंसूबे पर पानी फेरते हुए अपने क्षेत्र मेंविकास की हर कसौटी को खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। दंतेवाड़ा में चल रहा बीपीओ इसका एक छोटा सा उदाहरण है। इसी प्रयास का नतीजा है कि दंतेवाड़ा अब कॉल सेंटर का हबबनने लगा है। इसमें काम करने के लिए अन्य राज्यों से नहीं बल्कि आसपास के इलाके मसलन दंतेवाड़ा, बस्तर, जगदलपुर, सुकमा, कांकेड़ के युवा और युवतियों की फौज जमा होती है।बारहवीं, स्नातक और स्नातकोत्तर पास युवा और युवतियों बड़ी संख्या मेंयहां काम करते हैं। आस पास के क्षेत्रों के युवाओं को रोजगार मिलते ही इस संभाग की फिजां बदलने लगी है। आलम यह है कि आने वाले समय में बच्चे अपने दादा—दादी, नाना—नानी सेनक्सलियों के बारे में जान पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह बस्तर संभाग के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ही नहीं अब जनता भी कहने लगी है कि बस्तर बदल रहा है।

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