आज तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा

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पं,गणपति झा
नवदुर्गाओं में तीसरे शक्ति के रूप में पूज्यनीय माँ चंद्रघंटा शत्रुहंता के रूप में विख्यात है। इन देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनकी आराधना से समस्त शत्रुओं तथा भाग्य की बाधाओं का नाश होकर अपार सुख-सम्पत्ति मिलती है। इनकी पूजा के बाद निम्न मंत्र का 101 बार जप करने से बड़े से बड़ा शत्रु भी कुछ नहीं बिगाड़ पाता है।
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमरू।।

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