नवरात्रि आरंभ. पहले दिन मां शैलपुत्री + ब्रह्मचारिणी की पूजा

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पं,गणपति झा
नवरात्रि आरंभ हो चुके हैं। नवरात्रि में अलग-अलग दिन मां भगवती के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि नवरात्रों में किस दिन देवी के किस स्वरूप की पूजा की जाती है।
पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्रों में प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने के बाद सती योगाग्नि में भस्म हो गई थी तत्पश्चात उन्होंने हिमालय पर्वत के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। अतः पर्वत की पुत्री होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ गया। इनकी आराधना से जीवन में स्थिरता, सौम्यता तथा शांति का वरदान मिलता है। मां शैलपुत्री की पूजा के पश्चात निम्न मंत्र का 51 बार जप करना चाहिए इससे बड़े से बड़े अनिष्ट का भी खात्मा होता है।
वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम्।वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
पूणेंदुनिभांगौरी मूलाधार स्थितांप्रथम दुर्गा त्रिनेत्रा।
पटांबरपरिधानांरत्नकिरीटांनानालंकारभूषिता॥प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांतकपोलांतुंग कुचाम्।
कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीक्षीणमध्यांनितंबनीम्॥

मां पार्वती के ही स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रों के दूसरे दिन की जाती है। इन्होंने शिव को पति रूप में पाने के लिए उग्र तप किया था अतः ये ब्रह्म शक्ति अर्थात तप की शक्ति की प्रतीक है। इनकी आराधना से व्यक्ति अजेय बनता है और उसकी सर्वत्र विजय होती है।

ब्रह्मचारिणी: मां का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है। इनका यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय है। इनके दाहिने हाथ में जपमाला एवं बाएं में कमंडल रहता है। इनकी उपासना से तप, त्याग और संयम की वृद्धि होती है।

चढावा: माता ब्रह्माचारिणी को प्रसन्न करने के लिये शक्कर, दूध, दही, खीर का भोग लगाया जाता है। मां को सफेद पुष्प और स्फटिक की माला पसंद है।

पूजा: मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा की षोडशोपचार अर्थात गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य, इन पाँच सामग्री से पूजा की जाती है  मांब्रह्मचारिणी का ध्यान कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के बाद निम्न मंत्र का 101 बार जप करने से जन्मकुंडली के बुरे ग्रह भी अच्छा फल देने लगते हैं।

दधानां करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डल। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

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