इंडियन इकॉनमी के लिए वायरस से ज्यादा खतरनाक लॉकडाउन है : क्रिस्टोफर वुड

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 नई दिल्ली । कोरोना महामारी के कारण पूरे देश में 40 दिनों का लॉकडाउन जारी है। 20 अप्रैल से आंशिक छूट जरूर मिली है, लेकिन औद्योगिक गतिविधि पूरी तरह ठप है। अमेरिकन इन्वेस्टमेंट बैंकिंग ऐंड फाइनैंशल सर्विस जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटिजी ग्लोबल हेड क्रिस्टोफर वुडने कहा कि लॉकडाउन भारत को वायरस से ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला है। ह्यूमन वेलफेयर और इकॉनमी, दोनों के लिहाज से लॉकडाउन ज्यादा खतरनाक है।

अपने तर्क में उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे देशों में वहां की सरकार छोटे बिजनसमैन के लिए पे-चेक प्रोटेक्शन प्रोग्राम चला रही है जिसके तहत उन्हें करीब 349 अरब डॉलर की मदद दी जा रही है जिससे वे अपने एंप्लॉयी को इस क्राइसिस के दौरान सैलरी देते रहेंगे।

 

मोदी सरकार ने अब तक 1.7 लाख करोड़ की घोषणा की है

कोरोना के खिलाफ भारत सरकार की तरफ से अब तक उठाए गए कदमों की बात करें तो 1.7 लाख करोड़ के पैकेजी की घोषणा की जा चुकी है। यह जीडीपी का करीब 0.70 फीसदी है। इस राहत पैकेज में सरकार की कोशिश हर गरीब का पेट भरने की थी। उद्योग जगत के लिए अब तक राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई है। विकसित देशों की बात करें तो वे उद्योग जगत को बचाने के लिए जीडीपी का 20 फीसदी तक पैकेज की घोषणा की है।

 

बैड लोन बढ़ना बैंकों के लिए चुनौती

भारत को लेकर उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण कंज्यूमर लेंडिंग साइकिल में भी समस्या होगी। कई रिपोर्ट में दावा किया जा चुका है कि आने वाले दिनों में बैंकों पर बैड लोन का बोझ बढ़ने वाला है। उन्होंने रुपये में लगातार आ रही कमजोरी पर भी चिंता जताई। कच्चे तेल की कीमत घटने के कारण भारत का रेमिटेंस भी काफी घट गया है।

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